“जैविक बागवानी” पर केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र, भुबनेश्वर द्वारा आयोजित परिचर्चा

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 “जैविक बागवानी” पर केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र, भुबनेश्वर द्वारा आयोजित परिचर्चा

            रासायनिक कीटनाशकों एवं उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले विपरीत प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ने से लोग अब जैविक खेती की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इस क्षेत्र में सुरक्षित एवं फलदार बागवानी के प्रति वचनबद्धता दिखाते हुए, जैविक खेती अपनाने वाले और न अपनाने वाले किसानों और बागवानी उत्पादों के शहरी ग्राहकों को एक मंच पर लाने तथा ओडिशा में जैविक बागवानी के अवसरों पर विस्तार से विचार-विमर्श हेतु केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र, भुबनेश्वर ने 29 दिसंबर 2017 को लिविंग फार्म्स, भुबनेश्वर के सहयोग से “ग्रामीण एवं परि-शहरीय क्षेत्रों में जैविक बागवानी : अवसर और समस्याएं” पर एक परिचर्चा आयोजित की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. पी.सी. लेन्का, पूर्व विभागाध्यक्ष, फल विज्ञान विभाग, ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने ग्राहकों में जैविक उत्पादों के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने शहरी आबादी के लिए फलों और सब्जियों की आपूर्ति पूल के सृजन के लिए परि-शहरीय जैविक किसानों के बीच संपर्क स्थापित करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. बी. रथ, विभागाध्यक्ष, कृषि-मौसम विज्ञान विभाग, ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने जैविक खेती के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि मृदा को जीवित तत्व के रूप में मानें और इसे स्वस्थ एवं पूर्ण जैविक तत्वों और कम्पोस्ट से पोषित करें। लिविंग फार्म्स के श्री जगदीश ने हानिकारक रासायनिक अवशेषों से रहित सुरक्षित आहार के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. पी. श्रीनिवास, प्रधान वैज्ञानिक, केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र, भुबनेश्वर ने परिस्थिति-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने और जैविक उत्पादक-सामग्रियों के उत्पादन की सुविधाओं के लिए केंद्र द्वारा की जा रही अनुसंधान-गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ. जी.सी. आचार्य, अध्यक्ष, केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र, भुबनेश्वर ने अतिथियों, किसानों और अन्य साझेदारों का स्वागत किया और केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र, भुबनेश्वर की गतिविधियों और केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों की विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर एक तकनीकी परिचर्चा आयोजित की गई जिसका समन्वयन डॉ. पी.सी. लेन्का, डॉ. एकादशी नंदी, डॉ. बी. रथ और डॉ. पी. श्रीनिवास ने किया। काकटपुर के श्री प्रकाश बिस्वाल, मुनिगुडा के श्री भारत काशी, बलिपटणा के श्री उमाशंकर, नवरंगपुर के श्री गिरधारी मिश्रा, कटक के श्री दिब्यपाल प्रधान, धेंकानल के श्री एच.के. पाल जैसे किसानों ने टिकाऊ कृषि तरीकों और अपने-अपने अनुभवों का उल्लेख किया। श्रीमति पुष्पा पाण्डा, श्री मंगल विजय, सुश्री अमृता जैसे उद्यमियों ने शहरी क्षेत्रों में जैविक उत्पादों के विपणन की संभावनाओं के बारे में बताया।

इस कार्यक्रम में रायगदा, गजपति, नवरंगपुर, खुर्दा, कटक, पुरि, धेंकानल और जगतसिंहपुर जिलों के किसानों, शोधार्थियों, गैर-सरकारी संगठनों के सदस्यों, छोटे उद्यमियों, बागवानी उत्पाद विक्रेताओं, प्लांट लवर्स संघ के सदस्यों, लिविंग फार्म्स के सदस्यों तथा केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र, भुबनेश्वर के तकनीकी कर्मचारियों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. पी. श्रीनिवास, प्रधान वैज्ञानिक,  डॉ. कुंदन किशोर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. पी. नरेश, वैज्ञानिक, श्री चंद्रसेन दुर्गा, तकनीकी सहायक और श्री बिष्णु चरण पात्रा, वरिष्ठ तकनीशियन ने किया।